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चेतावनी!!!

"हर कोई जानता है कि यह असंभव है। लेकिन एक बार एक अज्ञानी आता है,

जिसके लिए यह अज्ञात होता है — और वह एक खोज करता है "।

 अल्बर्ट आइंस्टीन

शुरुआत करने के लिए यह वीडियो देखें।

क्या आपने देखा? यह किसके बारे में है? पिस्सू(खटमल) के बारे में? या हमारे बारे में? या फिर जो लोग बैंक प्रणाली में पैदा हुए थे उनके बारे में?

क्या आप कभी ये नहीं सोचते हैं कि आप महान कार्यों के लिए पैदा हुए हैं ? न कि कांच के जार के लिए और न सुस्ती और निराशा के लिए, जो कि अपको आज चारों और से घेरे हुए है। और न ही  सुबह से शाम तक किसी और के लिए जबरन कठिन परिश्रम करने व उस कठिन परिश्रम के बदले कुछ निरानंद (बिना आनंद का) पैसों के लिए? 
और न ही इसी पर पूरी ज़िन्दगी बिताने के लिए!
आपके पास एक ही जीवन है, क्योंकि आपको दूसरा मौका नहीं मिलेगा!!
कभी नहीं !!! 

क्या आपने इसके बारे में कभी कभी सोचा है ? यदि हाँ, तो हमारे पास एक ही रास्ता है!
हम दुनिया बदल रहे हैं!आज आप दूसरों की मदद करोगे — कल आप मदद पाओगे।

या नहीं। यहाँ एक और बात है। एक छोटा सा विषयांतर।

सबसे पहले। जानकारी के लिए। हम अभी भी एक गुलाम समाज में रहते हैं। जैसा कि हमने हजारों साल पहले किया था। उसके बाद से कुछ भी नहीं बदला है।  सिवाय उसके जंजीरें अब किफायती हैं। केवल यही फर्क है। और बाकी के लिए, सब कुछ वैसा ही है। अभी भी दास और मालिक हैं। मालिक वह हैं जो पैसा मुद्रित (छापते) हैं। क्या आप आश्चर्यचकित हो गए हैं? :-))

अगला। पैसे क्या हैं? कुछ भी नहीं! शून्य। एक प्रेत। खालीपन! बस रंगीन कागज, खूबसूरती से सभी प्रकार के वॉटरमार्क, प्रतीकों और चित्रों के साथ सजाया गया कागज़ । (सामान्यतया महान पुरुषों की तस्वीरें। वे बहुत सम्मानित प्रतीत होते हैं। :-))मालिक जब भी चाहते हैं और जितनी भी मात्रा में चाहते हैं, पैसा मुद्रित करते हैं।

पैसे कागज़ के टुकड़ों से ज्यादा कुछ भी नहीं हैं। मालिक इसे "काम के भुगतान के रूप में" दास को देते हैं। ऐसा करते हुए,वे सत्यनिष्ठा के साथ दास को सिखाते हैं कि,"पैसे ईमानदारी से अर्जित किया जाना चाहिए।" और दास लोग एक आज्ञाकारी शिष्य की तरह उनको सुनते हैं। हम लोगों का सभी तरह की किताबों,पर्चों,फिल्मों और मीडिया समूह द्वारा मस्तिष्क दोहन किया जा रहा है। ये सभी विशाल, सुसंगठित,निर्दयी और मस्तिष्क दोहन में निपुण मशीनें हैं, जिनके द्वारा हमारे मस्तिष्क का दोहन किया जा रहा है। गुलामों को दूसरी किसी बातों से कोई मतलब नहीं है, और वे सोचते हैं कि दुनिया को इसी तरीके से काम करना चाहिए, और उनके पास इसके सिवाय कोई दूसरा रास्ता नहीं है।

एक साथ मिलकर हम दुनिया को बदल सकते हैं।

एक बात और है। वास्तव में, लोगों को बहुत अधिक पैसे की जरूरत नहीं है। केवल पैसा महत्त्वपूर्ण नहीं है। महत्त्वपूर्ण यह है कि आप इसके होने के बारे में जानते हैं। आप जानते हैं कि यह पैसे का एक डिब्बा है, जिसे आप किसी भी समय खोल सकते हैं और जरूरत के हिसाब से पैसा निकाल भी सकते हैं। यह वास्तव में महत्वपूर्ण है। भविष्य में आत्मविश्वास। विश्वसनीयता।

अब एम एम एम एक ऐसा ही पैसे का डिब्बा है। एक सार्वजानिक डिब्बा। जो कि सभी के लिए है। पैसे का डिब्बा, जहाँ पर लाखों लोग अपनी पूँजी रखते है। क्या आपको पैसे की आवश्यकता है ? इस डिब्बे को खोलिए और जितनी जरूरत है उतना निकाल लीजिये। इतनी ही बात है। एक तरह की वैश्विक पारस्परिक सहायता राशि। आज आपने मदद की है — कल आपकी मदद की जाएगी। यही इस प्रणाली का मतलब है। आप प्रणाली में शामिल होने से पहले इसकी विचारधारा पढ़ें। यह बहुत ही महत्त्वपूर्ण है।

 

चेतावनी!!!

यहाँ पर कोई आश्वासन और वादे नहीं किये जाते हैं। न तो सुस्पष्ट और न ही अस्पष्ट।

यहाँ पर न तो कोई निवेश और न ही व्यापार है। प्रतिभागी प्रत्यक्ष रूप से और बिना बिचौलियों के माध्यम के एक दूसरे को पैसे भेजते हैं। बस इतना ही। इससे अधिक कुछ नहीं है।

यहाँ पर लेन देन की कोई प्रतिभूति सुरक्षा नहीं है, प्रतिभूति बाजार के पेशेवर प्रतिभागियों के साथ कोई रिश्ता नहीं है; आप किसी भी प्रतिभूति का अधिग्रहण नहीं करेंगे। (क्या आपको उनकी ज़रूरत है? :-))

कोई नियम नहीं हैं। सैद्धांतिक रूप में। केवल एक ही नियम है कि कोई नियम नहीं है। बिल्कुल। भले ही आप सभी निर्देशों का पालन करते हो तब भी आप "खो" सकते हो। ये भी हो सकता है कि "उपार्जित धन" का भुगतान न हो सके। बिना किसी कारण और व्याख्यान के उपरोक्त बातें हो सकती हैं।

और सामान्य में, आप अपने सारे पैसे खो सकते हैं। हमेशा इस बारे में याद रखें और केवल अतिरिक्त पैसे के साथ भागीदारी करें। या बिल्कुल भी भागीदारी न करें। आमीन। :-))

रूस, कजाकिस्तान और बेलारूस के नागरिको को एम.एम.एम. में भाग लेने की अनुमति नहीं है।

 

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